गर्मी को बाँधने वाली घंटी

गर्मी को बाँधने वाली घंटी

The Bell That Binds Summer
सिंगल2026.07.28
एक जापानी फैंटेसी J-POP गीत जो बचपन का वादा और गर्मियों के त्योहार की रात अचानक मिलने की कहानी बयाँ करता है। बारिश के मौसम के बाद की सुबह, बरसों बाद गए पुराने मंदिर में। जब नीले रंग की डोरी से बंधी घंटी बजती है, तो पानी से सींची पत्थर की सड़कें, सुबह-सुबह के फूल, टिड्डे, बरामदे में तरबूज, रामुने, बर्फ़ीला मीठा, युकाता, लालटेन और आतिशबाजी जैसी जापानी गर्मियों की यादें फिर जाग उठती हैं। भीड़ के पार से कोई जानी-पहचानी आवाज़ आती है। और दो अलग-थलग पड़े लोगों की हथेलियों में वही घंटी की आवाज़ फिर एक साथ बजने लगती है। कोटो, शामिसेन, शिनोबुए, घंटी और ताइको की धुन आधुनिक J-POP की ताज़गी से मिलकर ठंडी गर्मियों की हवा जैसी पारदर्शिता और मिलन के पल की उमंग दिखाती है। उस गर्मी की कल्पनाशील कहानी का आनंद लें जो बिखरे वक़्त को फिर से बाँध देती है।

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गीत (जापानी)

梅雨明けの朝 川辺の道 久しぶりの 古いお社 藍染めの紐 結んだ鈴 あの日の約束 まだ残る ちりんとひとつ 空へ鳴らせば 青い涼風 目を覚ます 夏結びの鈴が鳴る 青い風を 連れてくる 打ち水 朝顔 蝉時雨 眠る小道を 駆け抜ける 離れた君へ 届くよう ほどけた季節を 結び直す 鈴の音から 開いてく 僕らの夏が 始まる 縁側でスイカを 分け合って ラムネの空を 飲み干した かき氷の 甘い雪 うちわの風に 浴衣が揺れる 提灯灯る 鳥居の先 懐かしい鈴が 応えた 人の波の 向こうから 懐かしい声が 名を呼んだ 振り向く君の 手の中で お揃いの鈴が 光ってた 夏結びの鈴が鳴る 二つの音色 重なって 祭囃子を 飛び越えて 大きな花火へ 昇ってく 離れた日々も この夜に 優しい光へ 変わってく ほどけた季節を 結び直し 僕らの夏が 動き出す 夏結びの鈴が鳴る 今度の夏も またここで 線香花火 ひとつ揺れ 二つの鈴が 風に笑う

अनुवाद

बारिश के बाद की सुबह, नदी किनारे का रास्ता एक पुराना मंदिर जिसे बहुत दिनों से नहीं देखा इंडिगो रंगा हुआ डोरा, बंधी हुई घंटी उस दिन का वादा अब भी बाक़ी है एक घंटी की आवाज़ आसमान की ओर गूँजती है नीली ठंडी हवा आँखों को जगाती है गाँठ बँधी गर्मी की घंटी बजने लगती है नीली हवा को साथ लाती है छिड़का हुआ पानी, सुबह के फूल, टिड्डी की बौछार सोते हुए रास्ते से दौड़ती हुई जैसे दूर तुम तक पहुँचे खुले हुए मौसम को फिर से बाँधना घंटी की आवाज़ से, सब खुलने लगता है हमारी गर्मी शुरू होती है बरामदे में तरबूज बाँटना रामूने वाले आसमान को पी जाना कुरेदी बर्फ़ की मीठी बर्फ़ युकाता पंखे की हवा में लहराती है लालटेन से जले तोरीइ फाटक के आगे एक यादगार घंटी ने जवाब दिया भीड़ की लहर के पार से एक यादगार आवाज़ ने मेरा नाम पुकारा मुड़े हुए तुम्हारे हाथ में हमारी जोड़ी की घंटी चमक रही थी गाँठ बँधी गर्मी की घंटी बजने लगती है दो स्वर एक-दूसरे पर छा जाते हैं मेले के संगीत से ऊपर कूदते हुए बड़े पटाखों की ओर बढ़ते हुए अलग-थलग दिन, इस रात में कोमल रोशनी में बदल जाते हैं खुले हुए मौसम को फिर से बाँधना हमारी गर्मी चलने लगती है गाँठ बँधी गर्मी की घंटी बजने लगती है इस गर्मी में भी, फिर से यहीं एक स्पार्कलर लहराता है दो घंटियाँ हवा में हँसती हैं